डेनमार्कबाट पूर्ण बन्धनले थारु भाषामा लेखे रेशम चौधरीलाई पत्र

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पूर्ण बन्धन डेनमार्क

डेनमार्कमा बस्दै आएका पूर्ण बन्धनले सामाजिक सन्जाल मार्फत रेशम चौधरीलाई थारु भाषामा एक पत्र लेखेको जानकारी दिएका छन् ।

उनले लेखेको पत्र :

इतिहास रच्ने विजयका लागि बधार्इ र आगामी कार्यकालको अपार सफलताको कामना गर्दछु । केही दिनदेखि म तिमीसंग लगातार सम्पर्क गर्ने प्रयासमा छु, फेसबुकको म्यासेन्जरमा थुप्रै सन्देश पनि छोडेको छु । बाँकी कुरा थारुभाषामै बढि प्रस्ट किन पार्न चाहन्छु भने तिम्रा कतिपय अनुयायीहरु अधिकांसले राम्ररी नेपाली नबुझ्न पनि सक्छन्, तर उनीहरुका लागि यो पत्र बढि सान्दर्भिक हुनेछ ।
सबसे पहले तो तुहिन बेढप्प बधाई और आगामी केन्द्रीय संसदके कार्यकाल सफलताक बहुत्तेक शुभकामना बा । बचपनके वात याद करेसेक्बो तो (मै फेन भुलाइगिल रहुँ, बटालाजी याद करैनै तो अब कब्बो नाइभुलम्) वात एैसिन रहे – जब तुँ पाँचछे वरसके रहो, नरबहादुर बटाला, हिरा भूल, जयबहादुर सिंह, मानवहादुर सिंह और मै धर्मापुरिक स्कूलमे नाटक करेकलग जाइटही । तुँ हमार पाछेपाछे जगतपुर बटालजीक घर अइलो । जाएकलग तयार हुइलो । तुहिन नाइजैना हो कहनै बटालाजी कि एक तो छोटबाटो, और रातके वहैंपर जाके निदाइजैबो तो तुहिन कौन बोककर नानी रे? मनै तोहार भित्रर तो कलाकारिताक ऊमेराईक भूतुवा सवार रहे, जौन कोई शक्तिसे फेन झुके नाइमान्लस । फेन तुँ कहलो कि, “अरे दादु मै नाइ सुतम और तुहुरनके जतना नेग्बो मै फेन उतरा नेगलेम, महिन नाइरोको । मै कुछ न कुछ सामान बोक के मदत करम कि” कहिके एकठो मन्द्रा बटालाजीक हाथसे छिनके आगे भाग गिलरहो ।
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PREM GEET - Kopia
ऐसिन कलाक पारखी तुँ भविष्यमा बहुत्तेक सालवाद एकदिन रेडियो सगरमाथक स्टेशन मे मिललो जहाँ तुँ फूलबारी नामक कार्यक्रम चलायो । मनै तुँ महिना भुलाइगिल हो, बडा मुस्किलसे पाछे याद कैलेरहो । जबजब मै घमराज लुँइटेलके साथ कार्यक्रम करे आउँ तुहिन फेन खोजूँ, कबो मिल्ली कबो नाइमिल पैली । कबो तुँ मोरिक अफिस माइतीघरमे बड्कावाला होन्डा एक्शल मोटरसाईकल पर आयो तो कबो कार पर । मै तोहार वात और प्रगतीपर गर्व करुं । मोरिक तुलनामें तुँ हजारौं गुणा प्रगती कैले रहो । पर उल्टा तुँ महिन आपन आदर्श मान्ठूँ कह्यो । इहे मेराइक, हमार समय विते लागल, तुँ संगितकार बनके गीत बनायो, शाही सेनाक जवान किहिन जुडो करातेक प्रशिक्षक तो कबो कुछ, कबो देउसीभैलीक सुमधुर गीत बनाके चर्चित हुएलग्लो तो कबो थारू भाषाक फिलिममे सखियै हो माघिक पिली गुरी जाँड से । फेन तुँ कैलालीक टिकापुरमे जाके फूलबारी एफएम खोल्लो, मै डेनमार्क एैनु ।बीचमे बहुत साल फेन हेराइली ।
मने हमार सम्पर्क फेसबुकके कारण से फेन सहजेक हुएलागल । एकदिन तुँ महिन फोन कैलो कि दादू मै टीकापुर महोत्सव करटुं, एकठो डान्सवालिन प्रथम पुरुष्कार स्पोन्सर करदेबी? मै तुरुन्त हाँ करनु और १५ हजार के ऊ पुरुष्कार मोरदाईबाबक नामसे बड्का दादक हाथसे दिलैनु । फेन तुँ फेन एकदिन फोन कैलो कि गोपाल बुटानिक सालिक बनाइटु, दादा सहयोग करे सेकबी? मै कहनु ज्यादा तो नाइसेकम मने, करम जरुर । बहुत दिन तक तोहार फोनओन नाइआइल, मै सोच्नु कि अब सायद नाइ बनाइटो ।
कैयों महिनावाद तोहार एकदिन फेन से फोन आईल कि दादु मै तो संबिधान सभाक चूनाव लडेक लाग तयार होइगिनु, काजुन कौन तराईक दलके केन्द्रीय उपाध्यक्ष पद फिन मिल्टा, उहेमारे पार्टी प्रवेश फेन करेके कैलाली क्षेत्र नम्बर एकसे चुनाव लड्टुँ । महिन पचास हजार सहयोग करेक पडि । मै बडा सोचमग्न हुइनु । पहिले तो तुँ आर्थिक सहयोगके लाग अनुरोध करुया मनै, उहेजुन मने आदेश हस देहनामेराइक लवजमे कहलो । महिना नाइ निक लागल और कहनु कि, “तोर दिमाग ठीक से काम तो करता कि नाई रे भाइ? तुहिन राजनिती से कम का नाइमिलल बा रे? हिरो बन्ले बाटे, सारा समाज तुहिन अत्रा सम्मान करठ । विजनेश व्यापार चकाचक, एफएम, टिभी सब फस्टक्लास चलल तो बा । फेन यी फोहरी राजनितीमे लागके का हासिल कैनास लाग्टा । मोर कहना मानबो तो, ई सब नाइकरना हो । करबो तो करो, ऊ तो त्वाहार नागरिक अधिकार हो । मोर हिसावसे ऊ डगरा तो ठीक नाई हो । जब तुँ मोर कहना विना मानके चूनाव लडेकलाग पैशा देहेकपडी कहतो, मै तो एक ढेला फेन नाइ देम । हाँ, जरुर देम जब तुँ कुछ, टीकापुर महोत्सव जैसिन थारु पहाडी सँस्कृति चिनैना काम करबो । दुःख मानो या सुख? मै तो ऐसिनमे ना तो कब्बो सहयोग कैले हुँ ना तो करम ।”
ई सब कहके हमरे विदावादी हुइली । मनै तुँ मोरिक सल्लाह नाई मान्लो । लागगिलो, उठ्लो कि नाई उठ्लो? महिन अभिनतक नाइपता हो । कारण, हमार सम्पर्क कम हुए लागल रहे । उहेबीच कुछ साल गुजरल और जब टिकापुर घट्ना हुइलस, तब जाके महिन मिडियासे पता चलल कि तुहिन दोषी करार कैल बा । तब महिन बहुत हि नाइमजा लागल, पुलिस और छोट लड्काक ज्यान गैलेक बरबर हत्याक दृश्य और त्वाहार हालत सुनके खुब रोइनु आँखभर आँसूकरके । राजनितीमे नाइलागो कहलेक वात मनले रहठी तो सायद, ऐसिन संगिन अपराधिक बिल्ला या कलंक नाइलागे । भारतमे जाके छुपलबाटो कहिके पता चलल, मनै खोजे नाइसेक्नु ।
टिकापुरिक घट्नाक तिनचार दिनवाद मै इहे मेराइक थारु भाषाम लेख लेख्नु । ऊ लेखके आसय रहे कि रेशम ऐसिन मनै नाई हो, वहुत हि दयालू स्वभावक, मानवसेवामे रुची रखुया मनै दोसरके ज्यान लेना मेराइक काम कैसिक करल? हो न हो, उहिन कोई न कोई फँसाइटा या रास्ता भटक गिल बा ।
लगभग १० महिनावाद, दिल्लीमे प्रचण्डक साथ मिललेक फोटो देख्नु तो फेन से तुहिन फेसबुकमे एकटिभ पैनु तो तुरुन्त फोन कैनु । तुँ फेन बहुत दुःख दर्दमे रहलेक बात वताइबाजे खुब रोइलो और महिनफिन खुब रुवैलो । लगभग दुईतिन मिनेट तक तो, हमार दुईजनहनके बोली नाइनिकलल, खाली सुंकसुंक आवाज कैके, आपनआपन स्नेह और प्रेमके आवेग बाहर निकलली । फेन मै उहे वात याद करैनु, तुँ स्वीकरलो । और पछुताए लग्लो । महिन से सल्ला माग्लो, अब का कैसिन के करुं कहके । मै तुहिन दुईठो उपाय सुझैनु । एक तो अब उपरान्त मै राजनिती नाई करम, और ऐसिन ऐसिनके महिन फँसैना नेतानके ई ई होईं कहिके आत्स समपर्ण करो । या तो, सब वृतान्त लिखके अब फरक मेराईक राजनिती करो, और ऊ राजनितीमे थारु पहाडीकबीचके भेदभाव नाहीं उहे पुरान मेराईक सामाजिक सद्भाव कायम करैना हो । जौन पुलिस और छोट लड्का सहिद हुईल बा ओकर दाईबाबक लग कुछ करम कहिके वाचा करो । थारुन के हक अधिकार के साथसाथ वैनके क्षमता विकासके डगरामे लागो मनै पहाडीक साथ वैनमनष्यता करे वेगैर ।
उहे दौरान हमार लगभग चारपाँच महिना रोज वात हुए । पोरसाल मार्चके महिनामे तुँ कहलो कि दादू दालभात खैना पैशा फेन नाई हो । एकदुई हजार पठैबो त, मोर चूल्हा जली । ऐसिन हालत मे बाटुं । मै एकदमसे भावकु हुईनु और जत्रा मग्ले रहो, उहि से ज्यादा पैशा पठैनु तो तुं किताव लिख्नावालिन काममे पुरापुरा समय दे पैलो, यी सब त्वाहार कहलेक वात कहटुं ।
तो तुँ मोरिक दोसर वात मे चलना स्वीकारलो । फेन किताव लिख्लो । वकर पाण्डुलिपी महिन फेन पठैलो । उ किताव आमाजोन मे डालके विश्वव्यापी बनाएक लग मै फेन कोशिष करनु । मने हिन्दी या नेपाली अक्षर सपोर्ट नाइकरलेक से छापामे जैना सल्लाह देनु । ऊ किताव जे जे पढ्ले बाटै, वैने तुहिन कदावी दोषी नाइमनही । उ सब वात अगर तो तुँ कलमके साथ पुरापुर न्याय करके सचसच लिखले बाटो तो । महिन तो अभितक विश्वासबा कि तु, कलमके साथ गद्दारी करुइया मनै नाइ हो ।
जब ऊ किताव निकलल, तो तुँ ज्यादा चर्चित हुईलो और विजी हुए लाग्लो । महिन पुरापुरा सन्तोष हुए लागल कि अब रेशम सहि ठगरामे जाईटा । उहेबीच, सरकार फेन क्षतीपूर्ति देहेकलग तयार हुईल । अब मोरिक समझमे यी वात नाई आईटा कि एक तो नेपाल सरकार तुहिन अपराधी मानके गिरफ्तार करेक लाग खोजटा । दोसर वर उहे सरकार क्षतिपूर्ति दैके, मुद्दा फिर्ता लेहेलेक वात फैलाइटा । उहे नेपाल सरकारके निर्वाचन आयोग तुहिन चूनाव लड्ना छुट फेन देहटा? यी सब घसरपसर मोरिक समझ मे नाई आईटा कि, असल बात का हो? उहेमारे मै तुहिनसे वात करेक लाग बेढप्प प्यासल बाटुं हो संघारी ।
और मोरिक खास मुद्दा यी हो कि, सबसे पहले तो उ डगरामे चल्बी जौन तुं स्कूलजीवन से ले कर गैरराजनैतिक और मिडियाकर्मीक जीवनमे रहेबाजी कह्यो कि तुं आधा अछामी हो । फेन तुंहि तो हो महिना आधा थारु कहुइया । तो अब सरकारी मुद्दामामिलाक वात तो मिल्बे करी । जब तुहिन जनमत मिलल बा तो, सर्वोपरी तो जनमत हो । कानून तो मिलाएक पड्बे करी । ऊ सब तो मिलाएक लाग मोरिक सल्लाहक कोई तुक नाई हो काहुन?
मोर तुक यी हो कि त्वाहार विजयक कारण ऊ क्षेत्रक जनताकबीच जौन खुलदूली बा, उसमे त्वाहार रणनिती का हुई? ऊ क्षेत्रक विकासके लाग तुं थारु पहाडिक भेदभाव करबो कि नाई करबो? जौन डगरा, पुल पुलैया, स्कूल बनैबो उ खाली थारुनके लाग मात्र तो अवश्य नाई बनैबो ना, कि बनैबो? बनैबो तो ऊ कैसिन के सम्भव रही, इ वात फेन जरूरी सोचले हुइबी, ना?
आखिरमे, प्रिय भाइ ! अगर तुं महिन वास्तवमे आपन आदर्श मन्ठो तो कृपया नीच भावनाक साथ जनसेवा नाइ करबी । थारु तो थारु बाटैबाटैं, थारुक तुलनामे पहाडिक वातमे ज्यादा सम्वेदशील रहबी । ऊ लड्का जौन शहिद हुईगिलबा ओकर फेन सालिक बनाके फूलबारी एफएमके आँगनमे राखना काम सबसे पहले करबी, तब जा के बाँकी भत्काइलवालिन सालिकके पुर्ननिर्णा तरफ लग्बी । गोपाल भूटानिक सालिक बनाएकलाग जौन आर्थिक अनुदान मै देहुईया रहुं, ऊ अभिनतक उधारा बा जे? हाँ ऊ उधार ऊ साउँद बाबुक सालिक बनाएबाजी अवश्य प्रदान करम् ।
बस आगे बढो, नीति नियम और नैतिकताक बलबुते पर दनदनादन आगे बढो, तुं एकदिन राष्ट्रके ऊ अहोदापर पहुंचवो, जहाँ कोईमाइका लाल सोचे फेन नाइसेकिहीं । यी वात मोरिक ब्रम्हसे निकल्टा कि त्वाहारेमे ऊ सब क्षमता बा ।बस सोचमे भाइचारा रहेक पडी । एकदिन रेशम चौधरी मात्र सांसद नाइ रही । ऊ मन्त्री प्रधानमन्त्री बनना हैसियत और भिजन राखठ । वस हृदयमे विशालता राखके एकठो विज्ञप्ति निकाललेहो, भिडियोमे आपन विचार सम्प्रेषण करेके समाजके सामुन्ने ऐना हिम्मत जुटाबी । बस ईहे बा मोरिक शुभ कामना ।
दुरदराज से तोहार नजिकके आपन दादा
पूर्ण बन्धन, कोपनहेगन
२०१७ १२ महिना १२ तारिख अपरान्ह १२ बजेर ५ मिनेट ।

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